Acharya Shri 108 Anand Sagar Ji Muniraaj 'Maunpriya'

श्रमण संस्कृति के प्रखर सूर्य के रूप मे आचार्य श्री आनंदसागरजी महाराज 'मोनप्रिय' का व्यक्तित्व एवं कृतित्व मौलिक विचार प्रयोक्ता के रूप मे प्रकाश-स्तम्भ की भांति कार्य कर रहा है । सतगुवां, जिला टीकमगढ़ की धरा को सर्वतोभद्र परम कल्याणी बनाते हुए पूज्य आचार्यश्री ने जहां पिता श्री छोटेलाल जी को महनीय बनाया वहीं माताश्री यशोदाबाई को भी प्रतिपल प्रणम्य जगज्जननी बनाकर इतिहास प्रषिद्ध कर दिया । बाल्यकाल से ही बालक सुरेश का व्यक्तित्व पूजित-सा ही रहा । छात्रावस्था मे प्रयुतपनमति विलक्षण मेधा से सबको चमत्कृत करता हुआ सतगुवां को सात रंग-रश्मियों वाली जग प्रतिश्ठित उज्वस्वित धरा बनाता रहा ।